
“कार्बन स्मार्ट कैंपस: पर्यावरण अनुकूल और स्वस्थ जीवनशैली” विषय पर हिंदी कार्यशाला का आयोजन
“कार्बन स्मार्ट कैंपस: पर्यावरण अनुकूल और स्वस्थ जीवनशैली” विषय पर हिंदी कार्यशाला का आयोजन
भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, एला, ओल्ड गोवा में जलवायु संकट की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए संस्थान के निदेशक महोदय के मार्गदर्शन में दिनांक 27 नवंबर 2025 को अपराह्न 03:30 बजे “कार्बन स्मार्ट कैंपस: पर्यावरण अनुकूल और स्वस्थ जीवनशैली” विषय पर एक हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए कार्यशाला केमुख्यवक्ताडॉ. परवीनकुमार (निदेशक) जीने बताया कि मनुष्य, पशु, पौधे तथा मिट्टी में रहने वाले सूक्ष्म जीव सभी श्वसन क्रिया के माध्यम से कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करते हैं। औद्योगिकीकरण और तीव्र जनसंख्या वृद्धि के कारण वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की सांद्रता लगभग 310 पीपीएम से बढ़कर 425 पीपीएम तक पहुँच चुकी है, जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक तापमान में निरंतर वृद्धि हो रही है।
ग्रीनहाउस प्रभाव को सरल रूप में समझाते हुए उन्होंने पॉलीहाउस/ग्रीनहाउस का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि सूर्य की अल्प-तरंग विकिरण अंदर प्रवेश कर लंबी तरंग ऊष्मा में परिवर्तित हो जाती है, जो बाहर न निकल पाने के कारण तापमान को अत्यधिक बढ़ा देती है। इसी प्रकार कार्बन डाइऑक्साइड, मिथेन, नाइट्रस ऑक्साइड तथा रेफ्रिजरेंट गैसें वायुमंडल में ऊष्मा को फँसा कर रखती हैं, जिससे पृथ्वी का तापमान बढ़ता है।
निदेशक महोदय ने यह भी उल्लेख किया कि शोध संस्थानों में सामान्य घरों की तुलना में लगभग चार से पाँच गुना अधिक बिजली की खपत होती है, जो अधिकांशतः कोयला आधारित विद्युत उत्पादन से आती है और सीधे कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को बढ़ाती है।उन्होंने कार्बन फुटप्रिंट कम करने हेतु कई व्यावहारिक एवं दैनिक जीवन में अपनाए जा सकने वाले उपाय सुझाए, जिनमें होटल अथवा गेस्टहाउस में प्रतिदिन चादर व तौलिया न बदलवाना, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक बोतलों और थैलों से परहेज़ करना, आरओ/अल्कलाइज़र पानी का उपयोग, वाहन साझा करना, समय पर वाहन सर्विसिंग कराना, अनावश्यक लाइट-फैन-एसी बंद रखना तथा एयर कंडीशनर का तापमान 26–27 डिग्री सेल्सियस पर रखना शामिल है।
उन्होंने बताया कि यदि संस्थान के लगभग 200 कर्मचारी प्रतिदिन केवल एक-एक किलोवाट बिजली की बचत करें, तो वर्ष भर में लगभग 52 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को रोका जा सकता है। यह बचत लगभग 2600 पेड़ लगाने अथवा 55 घरों की वार्षिक बिजली खपत के बराबर है।कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और स्वस्थ एवं सतत जीवनशैली अपनाने के प्रति जागरूक किया गया।
इसकार्यशालाकेआयोजनहेतूसंस्थानकेराजभाषाअधिकारीएवंसह-राजभाषाअधिकारीयोंने विशेषयोगदानदिया।